सेहत से खिलवाड़ : होली के त्यौहार में बढ़ेगी मिठाइयों की डिमांड, गाइडलाइन का नहीं हो रहा सही पालन, हमारी मिठास को सेहतमंद बनाने नियम पड़े 'फीके', दुकानों में मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट तक नहीं संवाददाता गोविन्द दुबे बरेली/उदयपुरा सहित क्षेत्रीय मिष्ठान भंडार संचालकों द्वारा आमजनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जिससे आमजनता को बतौर खामियाजा अपनी गाढ़ी कमाई डाक्टरों के लिए समर्पित करना पड़तीं है अनेकों बार समाचार प्रकाशन के बाद भी कारवाई नहीं होती अत: मिष्ठान्न भंडार संचालक मनमर्जी पर उतारू है स्टीकर निकालने व चिपकाने का झंझट, मिठाइयां मानक या अमानक महीने भर बाद बताएंगे हम आपको डरा नहीं रहे, मगर होली के त्यौहार पर आप जो खा रहे हैं या खाने जा रहे, वह गुणवत्तायुक्त है, मिलावटी या फिर नकली। इसका पता होली पर्व बीत जाने के बाद ही चलेगा। विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी जिन खाद्य पदार्थों का नमूना लेंगे। उसकी गुणवत्ता का पता कम से कम 1 माह या जांच सैम्पल के जांच पड़ताल के बाद ही पता चल पाएगा। तब तक बाजार में मौजूद मिलावटी खाद्य पदार्थ खप जाएगा। आप को बीमार होना होगा तो आप बीमार भी पड़ चुके होंगे। यानी मिलावटखोरी रोकने की यह मौजूदा व्यवस्था कितनी कारगर है, यह बताने की जरूरत नहीं है। त्यौहार के चंद दिनों पहले खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा मावा, बर्फी, लड्डू का नमूना जरूर लेंगे। लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट लेबोरेटरी से होली के माह भर बाद आएगी। ऐसे में इस होली पर्व में मिलावटखोरी पर प्रभावी कार्रवाई के किसी काम के नहीं होंगे। इस संबंध में दुकानदारों के सामने हर रोज स्टीकर लगाने व निकालने का झंझट है। दुकानदारों ने बताया कि मिठाईयों की एक बड़ी रेंज होती है, इस पर बार-बार तारीख बदलना मुश्किल होगा। चूंकि दुकान छोटी होती है, कर्मचारी भी कम होते है। वैसे भी लोग खरीदने आते हैं तो उसको बता ही देते है कि मिठाई कितने दिन तक खराब नहीं होगी। इस फेर में दुकान संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे है। जबकि यह नियम पूरी तरह से फॉलो हो गया तो उपभोक्ताओं को बहुत हद तक फायदा मिलेगा। इनका कहना है- व्यापारी नियमों का नहीं करते कडाई से पालन.... बर्फी हाउस या मिठाई दुकानों में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है तो गलत है। जल्द ही दुकानों में जाकर जांच की जाएगी। समझाइश के बाद भी नियम पालन नहीं करेंगे तो कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -कुदुसिया खान फूड इंस्पेक्टर जिला खादय एवं औषधि प्रशासन रायसेन
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लखनऊ/देवरिया उत्तर प्रदेश। सख्त अफसर का तबादला ? देवरिया से DGP मुख्यालय तक _उपलब्धियों के बीच उठे सवाल ? लखनऊ/देवरिया उत्तर प्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
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लखनऊ उत्तरप्रदेश। अगर प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है तो फिर ऊन प्रशासनिक अधिकारियों पर सम्मान रुप से कार्रवाई क्यों नही हो रही जिनकी जिम्मेदारी थी कि अवैध कार्य को रोका जाए क्या उनकी चुप्पी उनकी निष्क्रियता किसी अपराध से कम है अब जिम्मेदारी समान है तो कार्रवाई समान क्यों नहीं ? लखनऊ उत्तरप्रदेश से राजेश कुमार यादव की कलम से